Dr. Ambedkar Student Front of India (DASFI) Rajasthan State

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‘शिक्षित बनो, संगठित रहो संघर्ष करो’ का संदेश दिया

‘शिक्षित बनो, संगठित रहो संघर्ष करो’ का संदेश दिया

‘शिक्षित बनो, संगठित रहो संघर्ष करो’ का संदेश दिया

नागौर| डॉ.अंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया जिला इकाई की ओर से शुक्रवार को बाबा साहेब के 58 वें परिनिर्वाण दिवस की पूर्व संध्या पर कलेक्टर कार्यालय से अंबेडकर स्मृति भवन तक कैंडल मार्च निकाला गया। अंबेडकर स्मृति भवन पर संगोष्ठी आयोजित कर भारत र| डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब का परिनिर्वाण दिवस शनिवार को मनाया जाएगा। संगठन जिलाध्यक्ष रामचंद्र कंडेला ने बाबा साहेब के दिए गए नारे ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो संघर्ष करो’ को जीवन में उतारने को कहा। राजकुमार जावा ने बाबा साहेब के जीवन के अंतिम क्षणों में कहे गए शब्दों पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर भजन सिंह, ओंकार सिंह, गौतम नागौरा, श्यामाराम, पप्सा तंवर, जयसूर्या, ओमप्रकाश, जेठाराम, धुरेंद्र खुड़ीवाल श्रवणराम सहित डाॅ. अंबेडकर छात्रावास के सभी छात्र उपस्थित थे।

अंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस आज

स्थानीय अंबेडकर भवन में सुबह 9:30 बजे श्रद्धांजलि सभा होगी। सभा में प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी आमजन दो मिनट का मौन रखकर बाबा साहेब को याद करेंगे।

नागौर. कलेक्ट्रेटचौराहे से निकाले गए कैंंडल मार्च में शामिल सदस्य।

‘शिक्षित बनो, संगठित रहो संघर्ष करो’ का संदेश दिया
नागौर. कलेक्ट्रेटचौराहे से निकाले गए कैंंडल मार्च में शामिल सदस्य।
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1 Comment

  1. Bhuvnesh says:

    शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो
    =========================

    बुद्ध ने मनुष्य की चेतना में क्रांति पैदा की। इसके लिए उन्होने तीन समादेश जारी किए :-
    .
    1.) बुद्धं शरणं गच्छामि
    2.) धम्मं शरणं गच्छामि
    3.) संघं शरणं गच्छामि
    .
    जिन्हें बाबासाहेब अंबेडकर ने :- शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो कहा.
    .
    तथा जिसको मान्यवर कांशीराम ने Dalit Shoshit Samaj Sangharsh Samiti (DS-4), BAMCEF और Bahujan Samaj Party (BSP) बनाकर कार्यान्वित किया।
    .
    मगर पढे-लिखे दलितों ने इन समादेशों में उलटफेर कर उनको शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो कर दिया।

    लल्लुओं ने यह अर्थ निकाला कि शिक्षित होने के बाद आदमी संगठित होता है तथा उसके बाद ही संघर्ष किया जा सकता है।

    यदि ऐसा होता तो बाबासाहेब अंबेडकर आगरा में शिक्षित दलितों की अहसान फरामोशी से फूट-फूट कर क्यों रोते।
    .
    आज भी दलित कर्मचारियों के पॉकेट संगठनों के Letter Head में उपरोक्त क्रम गलत लिखा मिलेगा। अंबेडकरवाद में शिक्षित होने के बाद दलित कुदरती तौर पर आंदोलित हो जाता है और संगठन अपने आप बनता है।
    .
    भारत में सिर्फ मान्यवर कांशीराम ने BAMCEF के लेटर हेड में इसका सही क्रम लिखा। इसलिए वे कामयाब भी रहे।
    .
    इस सम्बंध में देखें लेखक की अन्य पुस्तक :- “बाबासाहेब के तीन उपदेश और उनका सही क्रम”।
    .
    SOURCE – प्रो॰ रामनाथ, “भारतीय नारी मनु की मारी”, सम्यक प्रकाशन, दिल्ली

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