Dr. Ambedkar Student Front of India (DASFI) Rajasthan State

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Our Ideal (हमारे आदर्श)

विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर

भीमरावरामजीआंबेडकर का जन्म ब्रिटिशों द्वारा केन्द्रीय प्रांत ( अब मध्य प्रदेश में ) में स्थापित नगर व सैन्य छावनी मऊ में हुआ था।  वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14 वीं व अंतिम संतान थे।  उनका परिवार मराठी था और वो अंबावडे नगर जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले मे है, से संबंधित था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो अछूत कहे जाते थे और उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। अम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे … Continue reading

मा. कांशीरामजी साहेब (Honorable Kansiramji Saheb)

कांशीराम – भारत की राजनीति में एकअनूठा व्यक्तित्व | बालक कांशीरामका जन्म खवासपुर गाँव – जिला रोपड़ –पंजाब में एक रामदासियापरिवार में हुआ था | गाँव मेंही शिक्षा ग्रहण करने वाले बालककांशीराम के दादा व चाचा फ़ौज में थे |कांशीराम ने विज्ञानं स्नातककी शिक्षा रोपड़ में ग्रहण की | बाल्यकल से लेकर शैक्षिक जीवन तक कांशीरामको सामाजिक भेदभाव व छुआ छूतका अनुभव… Continue reading

 

महात्मा ज्योतिबा फूले (Mahatma Jyotiba Phule)

का जन्म पुणे के एक माली परिवार में सन् 1827 में हुआ था। उनके पिता का नाम गोविन्दराव व माता का नाम चिमणाबाई था। इनके पूर्वज जीवन-यापन हेतु फूलो के हार व गजरे आदि बनाते थे, इसलिये लोग इन्हें फूले कहकर संबोधित करते थे। ज्योतिबा के जन्म के एक वर्ष बाद हीउनकी माता का देहान्त हो गया। बच्चों के भविष्य को देखते हुए उनके पिता ने पुनर्विवाह नहीं किया व स्वयं उनके लालन-पालन ने रूचि ली। ज्योतिबा बहुत बुद्धिमानबालक थे। लोगों ने गोविन्दराव से उन्हें विद्यालय में दाखिल करने को कहा। ज्योतिबा भी विद्यालय जाने को उत्सुक … Continue reading

नारायण गुरु (Narayana Guru)

श्रीनारायण गुरु का आविर्भाव

कई बुद्धिजीवी पर्यवेक्षकों की रायमें केरल में यह बदलाव भारत के अनूठे सुधारवादी संत-महात्माओं मेंसे एक श्री नारायण गुरु के कारण हुआ है। श्री नारायण गुरु ने जमीनी स्तरपर सामाजिक व धार्मिक सुधार किए और केरल में ठोस तथा रचनात्मक सामाजिक सुधार लाने में सफल भी रहे।… Continue reading

क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फूले (Krantijyoti Savitribai Phule)

उन्नीसवी सदी का पुणे शहर (महाराष्ट्र) भट-ब्राम्हणों के मनगढ़ंत तथा पाखण्डी धर्म शास्त्रों का अड्डा था. पुणे ब्राम्हणी धर्म शास्त्रों का अड्डा था. पुणे ब्राम्हणी धर्म एवमं संस्कृति की राजधानी थी किन्तु इस पुणे शहर को ही राष्ट्रपिता ज्योतिबा पुले ने अपने क्रांतिकारी कार्य तथा आंदोलन का केन्द्र बनाया था. राष्ट्रपिता ज्योतिराव फूले की पत्नी श्रीमती सावित्री बाई फूले (3जनवरी,1831-10 मार्च,1897)  अपने देश की महिलाओं में पहली शिक्षित स्त्री, पहली अध्यापिका, भारत की सभी जातियों में स्त्रियों की पहली नेता और छुआछूत की प्रथा का प्रखर विरोध करने वाली पहली कार्यकर्ता स्त्री है. वह नारी सामाजिक चेतना तथा आधुनिक शब्दावली में महिला सशक्तिकरण अवधारणा एवं आन्दोलन की आद्य प्रवर्तक थी . वह न केवल शूद्रातिशूद्रों तथा नारी शिक्षा … Continue reading

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